अस्तित्व पर है घात हमारे कहो मौन क्यों बैठे हो
सर्व धर्म समभाव की परिभाषा को भूल क्यों बैठे हो
दिल्ली के सत्ताधीशों से, ये प्रश्न आज हमारा है,
तीर्थ क्षेत्र सम्मेद शिखर पर कैसा वार तुम्हारा है ।।

रक्षा पावन पवित्र धरा की ये संकल्प हमारा है 
जैसे तुमको काशी - काबा, पर्वतराज हमको प्यारा है 
जियो और जीने दो जिसका सदैव रहा नारा है
खण्डित करते उसकी मर्यादा अत्याचार तुम्हारा है 
मौन हो कर देख रहे जो, अपराध सूची में नाम तुम्हारा है 
तीर्थ क्षेत्र सम्मेद शिखर पर कैसा वार तुम्हारा है ।।

राम मन्दिर सा आंदोलन हम भी खड़ा कर सकते हैं
अपने तीर्थ क्षेत्र के खातिर हम भी हिंसा कर सकते हैं
वह अग्नि प्रखर जो देश जला दे हम भी धधका सकते हैं
रोक दे जो कर हम जैनी, सड़को पर तुमको ला सकते हैं
हमने सदा ही देश पर अपने तन मन धन को वारा है
फिर तीर्थ क्षेत्र सम्मेद शिखर पर कैसा वार तुम्हारा है ।।

जाति धर्म के आधार पर हमनें कभी न किया बंटवारा है 
शायद इसलिए हमने पर्वत गिरनार गंवाया है 
शाश्वत पर्वतराज शिखरजी जीवित आर्दश हमारा है,
ये अभिमान हैं जैनों का हमें प्राणों से भी प्यारा है,
था हमारा और होगा हमारा, नहीं पर्यटन स्थल गंवारा हैं 
तीर्थ क्षेत्र सम्मेद शिखर पर सिर्फ अधिकार हमारा हैं ।।

समकित जैन "सारिकेय"