सबसे हटके जिसकी छवी हो

मुझसे जो प्यार करती हो

इक ऐसे ही साथी की तलाश है मुझको

जो हरदम मुझ पर ही मरती हो....


मेरी ख़ामोशी को समझे जोआँखों को मेरी जो पढ़ती हो

बातें हमारी तो होती हो , पर

शब्दों की जरूरत न पड़ती होदोस्त जो बन कर मेरी रहे वो

इशारों को मेरे समझती हो

इक ऐसे ही साथी की तलाश है मुझको

जो हरदम मुझ पर ही मरती हो....


न पीछे रहे जो न आगे हो

जीवन सफर में बस साथ जो हो

कदम मिला कर जो चलती हो

ऐसी हम-सफ़र साथी होशांत-स्वभावी सरल-व्यवहारी

बचपन से भी जिसका नाता हो

इक ऐसे ही साथी की तलाश है मुझको

जो हरदम मुझ पर ही मरती हो....


नयना हो जिसके नीलकमल से।।

होंठ गुलाब के पत्ती-से हों

वो हँस दे तो महका दे घर आंगन

सूरत उसकी यूँ भोली सी हो

चाँद भी देखे तो नजरें झुका ले

ऐसी अनुपम सौंदर्यता हो

इक ऐसे ही साथी की तलाश है मुझको

जो हरदम मुझ पर ही मरती हो....