बात यूँ नहीं है कि वो
अपना वो दीवाना भूल गयी..
आँखें तो मिलाईं यूँ उसने
नाम से बुलाना भूल गयी...



सुनाया तो उसने अपनी
तारीफ को खूब वाह लूटके
मेरे लिखी शायरी को वो
मेरा बताना भूल गयी..


और कोशिश नहीं की उसने
ऐसी भी कोई बात नहीं
बस किस्मत , किस्मत लिखते हुए
हमको मिलाना भूल गयी..

मिलते हुए जरूर जाएंगे
जब भी गुज़रेंगे तेरे शहर से
कहीं न होजाये के यह लड़की
हमारा जमाना भूल गयी..

इस बार घर भी थे
खोल दरवाजा भी लेते
कम्बखत मोहब्त लेकिन इस तरफा
दरवाज़ा खटखटाना भूल गई...

फिर से इंतेज़ार होगा
जो खुदा जैसी वो थी
छोड़ तो दिया मुझे उसने
छोड़के जाना भूल गयी..