
तुने हाथ तो छुड़ा लिया बता अब किधर जाऊँ
सहने ये मोहब्बत की जफ़ा अब किधर जाऊँ ।।
तेरा वो दिल ही तो ठिकाना था इकलौता मेरा
तूने भी निकाल फैंका है तो अब किधर जाऊँ ।।
तेरे ही चेहरे के पहरे लगे हैं हर रहगुज़र पर तो
क़ैद-ए-अक़्स से निकल के अब किधर जाऊँ ।।
वजह-ए-वहशत-ए-खिल्क़त से छलक ना सके
Read More! Earn More! Learn More!
