कहा तक चलोगे मेरे साथ हम हवा है,
चलते रहेंगे हमारी कोई भाषा,बोली,बनावट नहीं
हमारा कोई धर्म भी नहीं
हम हर साँसो की एक साँस है
मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा सबको छू कर चल देते
हमारा कोई आशियाना नहीं
हमारे पूर्वजो ने बस हमे चलना सिखाया
हमारी कोई बंदिशे नहीं,
ना कोई सरहद
विचल होकर चलता हूँ,
निडर हूँ
डरना तो कायरता की पहचान है
- sameer shaswat

