चल देते नगे पाँव,

बदन पे लिबास नहीं

इतने कड़क धूप मे

आसमान का भी छाव नहीं

लोगों की भूख मिटाने

चल देते हर दिन खेत पर

बड़े लोगों की तरह इन्हे ऐतवार नहीं

हर मौसम का मार खाते,

पर घर मे दो वक़्त की अनाज नहीं

कितने दिन भूखे सो जाते,

इनके घरों में,

जोमाटो स्विग्गी का आवाज नहीं