क्या कहते हो लगा दें हम भी स्टोरी
शहीदों के नाम की
और भूल जायें उनकी
शहादत
हरगिज़ नहीं ।।।
आवाज जिंदा है अभी भी
हम में इंकलाब की।।।
वो रुख़सत कर गये
जान अपनी
खेल कर बचाने आन
हिंदुस्तान की।
अरे!!! ये शोर कैसा सुना है
इंकलाब का
क्या हुआ
आवाम जाग रही है हिंदुस्तान की।।।
