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नये शहर में


आये हैं इस शहर में ,वक्त का पिटारा लेकरअपने, और अपने सपनोंको बेसहारा छोड़कर।।कुछ यारों की यादेंबोलियाँ देनदारों की लेकरसिर अपनों का उठानें के लियेवक्त मोड़चोरी, मुट्ठी भर लाया मेंपैरि जमीं अपनी मां की लेकर।। आये हैं इस शहर में

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