के है मालूम तुम बस कुछ दिनों के लिए दूसरे शहर गई हो,
के है राहत मैं तुम्हारे दिल में और तुम मेरे दिल में हो,
मिलती है तुम्ही से ताकत जिस पल मुश्किल में हो,
तुम्हारी आंखों में आंसुनुमा मोती मुझे दूर से भी दिख रहे थे,
तुम्हे ट्रेन से जाता देख मेरा कंठ कांपने लगा,
आवाज़ थरथराने लगी,
ट्रेन को आगे जाता देख मेरा दिल और भी भारी हो गया,
और इस तरह प्यारी का भोपाल सफर जारी हो गया।
- समीर
Pyaari's train journey❤️
Missing you ❤️

