ना सोच ज़्यादा तू भविष्य की,

तू वर्तमान में जी,

ज़िन्दगी का जो शरबत मिला है,

उसे तू मज़े से पी।

भले तू कर भविष्य का विचार,

पर अपना वर्तमान कर स्वीकार।

कोई नहीं यहां जो बता सके कल क्या हो,

करता जा हर वो काम, मन से हो जाए जो।

कर हर बात का ज़िक्र करीबी व्यक्तियों से,

मिलेगी राहत मस्तिष्क में चल रही उलझनों से।

मत कर फ़ैसले लेने की तू जल्दी,

हर कदम आहिस्ता रख,

जैसे घाव पर काम करती है हल्दी।

सफल होने की यही है मास्टर की,

ना सोच ज़्यादा तू भविष्य की,

तू वर्तमान में जी।


    

          - समीर