यूं तो ये मुल्क बस ज़मीन का टुकड़ा नहीं,

इसे किसी एक विचार ने जकड़ा नहीं,

हज़ारों, लाखों लोगों ने दिया बलिदान का साज़,

तब जाकर ये मुल्क हुआ अंग्रेज़ो से आज़ाद,

है हम खुशनसीब के हमे बनी बनाई आजादी मिली,

वरना करो याद पन्ने वो इतिहास के,

के इसके लिए कितने हाथ कटें,कितने पैर टूटे, कितनी लाशें है जली,

जब इस देश का हर इंसान होगा स्वस्थ,

विचार होंगे उनके उत्कृष्ट,

आर्थिक रूप से बने वो सक्षम,

खुद संग देश का करेंगे वो रक्षण,

युवाओं को भारत मां का यही एक कहना है,

तुम्हारी बुद्धि और ऊर्जा देश का गहना है,

खुद को तराशने हेतु,

मेहनत और त्याग की चीनी हथौड़ी की मार को सहना है,

मिठी जलधारा सम तुम्हे आगे ही आगे बहना है।


- समीर