रखो सोच को सकारात्मक तुम,

हो ना जाओ नकारात्मक अंधेरे में गुम,

नकारात्मक लोगों से रखो तुम दूरी,

संपूर्ण विकास के लिए ये बात है जरूरी,

जानो अपनी ऊर्जा तुम,

बढ़ाओ जीवन का दर्जा तुम,

जिन से मिले तुम्हे सकारात्मकता,

वहीं है तुम्हारे शुभचिंतक,

तुम्हारे अंदर है, वो साथ देगा तुम्हे अंत तक,

सभी इंद्रियों को खोलो तुम,

मस्तिष्क को अपने टटोलो तुम,

फिर कुछ बात बोलो तुम,

अपने अंतर्मन से करो बात,

चाहे दिन हो चाहे रात,

समक्ष खड़ा प्रश्नों का झुंड,

क्यों खोज़ रहे दुनिया में तुम,

झाकों खुद के अंदर तुम,

हर प्रश्न के उत्तर में तुम।


- समीर