रंग से भरा मुझको, रंग दी ज़िन्दगी मेरी!
होली जो खेली प्यारी संग, मानो हो गई दिवाली मेरी,
मैं तो रंगा हूं उसके रंग में, प्यार के इस जीवन में,
सभी खुश रहे अपने ढंग में,कठिनाइयां हो जाएं छूमंतर, यूं पल्लवित होते पल में,
होली से सबके चेहरे निखरें,
एक हों जाए रंग जो बिखरें,
प्यारी से भी प्रेरणा मिली काव्यात्मक रंग की,
ज़िन्दगी भर चुस्ती रहेगी उसके संग की!
रंगों के इस त्यौहार में न रहें कोई रंग अनछुआ,
सभी की हो उन्नती और बरकत यही हैं मन से दुआ,
एक ही है यह ,इस ज़िन्दगी को ना समझो जुआ,
उन पर भी उड़ेल दो क्षमा का रंग जिनसे अनजाने में कुछ ग़लत जो हुआ,
यह सीख मिली मुझे प्यारी से ,
जो मिली थी उसे दादीजी से!
- समीर


