अब नहीं सही जाती तुम से मिलने की दूरी,
मेरे अंदर भर चुकी है बेचैनी पूरी,
रोज़ की ज़िन्दगी मानो लग रही मेरी अधूरी,
ओ मेरी प्यारी तुम ही कर सकती हो ये जादूगरी,
तुम से मिलने की इच्छा मेरी कर दो ना पूरी,
गुस्से संग आ रहा है हालात पर रोना,
क्यों की प्यारू देखना चाहता मुखड़ा तुम्हारा सलोना,
याद कर रहा तुम्हे मेरे दिल का हर कोना,
तुम से लिपटकर है मुझे मंसोक्त रोना।
- समीर


