पहले कभी ऐसा ना हुआ था,

रोज़ एक ही शख़्स से मिलने की इच्छा नहीं हुई थी!

उससे मिलके मुझमें बदलाव आया,

उसका हर गुण मेरे मन को भाया,

रोज़ उससे बातें करनी हैं, उससे मिलना हैं...

हर पल साथ गुज़ारना हैं, उसकी बाहों में रहना हैं,

उस ने मेरी मुस्कुराहट को खिला दिया,

मुझको इक हसीन तौहफा दिया हैं,

सकारात्मक ऊर्जा से जीवन को भर दिया हैं...

हर चीज़ लगने लगी प्यारी,

उसकी हर अदा निराली,

आसमान में मधुर पंछी चहके,

हवाओं में उसकी खुशबू महके,

उसकी याद आती,

मेरी नींद जाती,

प्यारा एहसास देती,

ऐसा भी हो ज़िन्दगी की राहों में,

आंखें खुले और वो हो मेरी बाहों में,

अब वही हैं प्रीत में,

वहीं हर गीत में,

दिल को जो राहत दे,

हर वो संगीत में,

लेखन में उसने मुझे प्रोत्साहित किया,

उसी ने मुझे प्रेरित किया,

मेरी इस कला को मैंने उसे समर्पित किया।


- समीर