दोस्ती में कहां मायने रखता किसकी कितनी आय!

अहम हो जाती संग पी हुई सादी नुक्कड़ वाली चाय,

दोस्ती में न कोई जात धर्म,

बस एक दूजे का साथ मर्म,

उपलब्धता उनकी काफी चाहे हो गुमसुम सी अंधेरी रात,

ज़िक्र न होता क्या उपकार , क्या खैरात!

इंसानियत ही रहे अव्वल भावार्थ,

अपनों संग यादें सहेजूं मैं होकर निस्वार्थ,

हम संग आरंभ करते शुभ काम स्मरण करके श्री गणेश,

मुल्क बस अलग हैं प्रेम से ही तो मुंह से निकले बिस्मिल्लाह!

पंडित हो, पादरी हो, या हो मुल्ला,

एकता की ताकत से समाज कितना उज्ज्वल बन जाएं

समाज में मिलकर अधिकारों की जागरूकता लाए,

जाती धर्म के नाम पर लड़ना नहीं उचित ये समझाए,

सब से पहले हम है इंसान ये याद दिलाए,

नई पीढ़ी को एकता का महत्त्व सिखलाए।



         - समीर



Thankyou so much Pyaari for the tips and editing ❤️✒️