मन से कहो ,ये सुबह कितनी सुहानी है,

चलती हवाओं संग बादलों से टपक रहा पानी है,

हर दिन एक नई कहानी है,

शायद प्रकृति को हमे रोज़ नई चीज़े सिखानी है,

समय के संग उठानी नई ज़िम्मेदारी है,

खुद के अंदर बरकरार रखनी मेहनत की चिंगारी है,

आशा करते के जल्द ही खत्म हो ये जो महामारी है,

हमे मजबूत बनाया है उसने,हमे जन्म देने वाली जो नारी है,

ये रखना ध्यान में,

तुम्हारे सामने हर चुनौती हारी है,

हर मुश्किल पर पड़ता तुम्हारा आत्मविश्वास भारी है,

क्रोध, हिंसा, दुश्मनी, ये सब क्या है?

हम सब तो स्नेह और प्यार के पुजारी है,

सभी का जीवन प्रवास,

मस्ती,उल्हास,उमंग और चुनौतियों संग रोज़ जारी है।


          - समीर