Poetry 1 min read 619.5K reads

मित्र


घनघोर घटा की छाया मेंथा खोया जब साया मेराज्योतिपुंज की आभा बनकरतुमने ही तो दिखलाया पथ ।

कैसे कहूँ, मैं आभारी हूँजब जीवन का श्रेय तुम्हीं कोकैसे कहूँ ऋण चुकता दूँगाजब मन, प्राण समर्पित तुझको ।

Read more Earn more Learn more