जिस्म बिकता हर गली में प्यार न मिलता दुनिया में ! हवस की दुनिया रह गयी देखी इनसानियत सपनो में !! राम का बस नाम रह गया मर्यादा भी खत्म हुई ! मां बाप की सेवा करना बस पननो में रह गयी!! गीता के भी पन्ने फाड़े हमने अपने हाथों से जिस्म बिकता हर गली में प्यार न मिलता दुनिया में ! हवस की दुनिया रह गयी देखी इनसानियत सपनो में!!