खामोशी का समां है और मैं हूँ
बस्ती ए गुमाँ है ओर मैं हूँ
इस खामोश बस्ती में अब कुछ रहा नहीं
मुर्दा हसरतें हैं यहाँ और मैं हूँ
खामोशी है ज़मीं से आसमाँ तलक
किसी की दास्तां है और मैं हूँ
क़यामत है पसरी पूरे आशियाने में
तलाश ए रहनुमा है और मैं हूँ
कहाँ है कोई हम ज़बाँ इस वहशत में
फकत मेरी ज़बाँ है ओर मैं हूँ
तलाश है मुझे किसी ज़िंदा तमन्ना की
बस ज़िंदा मेरी तमन्ना है और में हूँ ........


