वो शब्द कहाँ से मैं लाऊं,

जिनसे मैं तुम्हे रिझा पाऊं,

तुम जैसे कोई पारस पत्थर,

कैसे मैं तुमको छू पाऊं।

तुम गंगा जैसी पावन हो,

सुंदरवन सी मनभावन हो,

मैं कैसे तेरा हो पाऊँ,

मैं कैसे तेरा हो पाऊँ।