बेशक मुझपे तौहमते लगा दो तुम हजार,
लेकिन तुम ही हो मेरे इस जीवन का आधार।
सुबह तेरे मेसेज से होती है दिन की शुरुआत,
फिर व्हाट्सएप पे होती है हम दोनों की मुलाक़ात।
तेरे मुस्काने से आती है मेरे दिल के पतझड़ में बहार,
तेरे आँचल लहराने से चलती है ठंडी पुरवा बयार।
मन ओत-प्रोत हो जाता है करती हो जब सोलह श्रृंगार,
मेरे मन के सागर में उठ जाता है जैसे कोई ज्वार।
©Sallu Shrivastav


