मैं ठोकरें बहुत खाता हूँ, तुम साथ चल सको तो चलो मैं झूठ कम बोलता हूँ, सच से बहल सको तो चलो ज़माना रोज़ ही बदलता है, तुम गर ठहर सको तो चलो दिल मेरा शौकिया रूठता है, तुम इसे मना सको तो चलो तबीयत यूं भी मचलता है, तुम मुझे संभाल सको तो चलो जिस्म शर्मीले जेवर पहनता है, तुम सबको उतार सको तो चलो सरे-बाजार अक्सर शायर बिकता है, नज़्में जो खरीद सको तो चलो।। - सलिल सरोज