
मेरे गाँव
के ढहते स्कूल में
दफ़्न हैं-
पास से बहती
बैंती नदी की उच्छृंखलता
धूल -धूसरित सड़कों का अट्टाहास
मंदिर की घंटियों का कलरव
कुएँ की पानी की शीतलता
खेतों के पेट से उगता सरसों
और
गोधूलि में लौटता बैलों का जोड़ा।
पर जो नहीं है
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