सूख चुके पीपल में देखो

फिर से हो आई है हरियाली

ये पीत वर्ण की धरती सुंदर

सुंदर हर वृक्ष पात व डाली

सतरंगी ये वृक्ष लताएँ

कोयल की मीठी कूक निराली

ये पीत वर्ण की धरती सुंदर

सुंदर हर वृक्ष पात व डाली

सरसों से पीले खेत झमाझम

कोयल की मीठी कूक निराली

ये पीत वर्ण की धरती सुंदर

सुंदर हर वृक्ष पात व डाली

कहीं फागुन के गीत मधुरिम

कहीं ऋतुराज की छवि निराली

ये पीत वर्ण की धरती सुंदर

सुंदर हर वृक्ष पात व डाली