कुछ कामना न हो भलेपर सुप्त अनल इक ऐसी होज्वाला बनकर बरसे जिस दिनसुखमय परम हितैषी हो
कुछ कामना न हो भलेपर सुप्त अनल इक ऐसी हो
ज्वाला बनकर बरसे जिस दिनसुखमय परम हितैषी हो