घूमेगा जिस दिन चक्र काल का।उस दिन को सबने जाना है।।व्यक्ति से न कोई जाना जाता।व्यक्तित्व को आगे लाना है।।सुख तो केवल है अल्प भोग।दुःख को तो रोज आना है।।चाहे कितनी भी पीड़ा हो।उसको क्षणिक बनाना है।।
घूमेगा जिस दिन चक्र काल का।उस दिन को सबने जाना है।।
व्यक्ति से न कोई जाना जाता।व्यक्तित्व को आगे लाना है।।
सुख तो केवल है अल्प भोग।दुःख को तो रोज आना है।।
चाहे कितनी भी पीड़ा हो।उसको क्षणिक बनाना है।।