घूमेगा जिस दिन चक्र काल का।

उस दिन को सबने जाना है।।

व्यक्ति से न कोई जाना जाता।

व्यक्तित्व को आगे लाना है।।

सुख तो केवल है अल्प भोग।

 दुःख को तो रोज आना है।।

चाहे कितनी भी पीड़ा हो।

उसको क्षणिक बनाना है।।

          ----- सलिल पन्त