वो जंगल के छोर पर आकर रुक गया, मुझे यकीन था की जंगल के छोर पर आकर वो मुझे जरूर मुडकर देखेगा। अपने कान पीछे करेगा...गुर्राएगा.....अलविदा कहेगा....वो किसी तरह हमारे इतने दिनो के रिश्ते को किसी अंजाम तक पहुचाएगा.....।
पर वो तो बस आगे जंगल की तरफ ही घूरता रहा और जिद पर आकर वो मेरा खूँखार साथी (एक शेर), वो डरावना जानवर...जिसने मुझे इतने दिनो जिन्दा रखा .....मेरी जिन्दगी से हमेशा के लिए गायब हो गया।।
मैं एक बच्चे की तरह रोया था...इसिलिए नही की मुझे अपने बचने की खुशी थी, वो तो थी ही। मैं रो रहा था क्यूँकी रिचर्ड पार्कर (एक शेर) मुझे इतनी बेरुखी से छोड़ गया था ।मेरा दिल टूट गया था।
शायद मेरे अब्बा ठीक ही कहते थे की मुझे पार्कर ने कभी अपना दोस्त समझा ही नही, इतने दिनो के साथ के बावजूद उसने मुझे मुड़कर देखा तक नहीं।
पर मुझे यकीन है की उसकी आंखों मे मेरे ख्यालों की सिर्फ परछाई ही नही बल्कि और भी बहुत कुछ था....मैं जानता हुँ मैने महसूस किया है, भले ही मैं उसे साबित ना कर पाऊं।
मैं समझता हूँ आखिर में सबकुछ जाने देने का नाम ही जींदगी है, पर सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है जब आपको अलविदा कहने का मौका नही मिलता।
Lines taken from
goodbye scene of
Novel 'Life of pi'


