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छेल्लो दिवस (अन्तिम दिन)

वो जंगल के छोर पर आकर रुक गया, मुझे यकीन था की जंगल के छोर पर आकर वो मुझे जरूर मुडकर देखेगा। अपने कान पीछे करेगा...गुर्राएगा.....अलविदा कहेगा....वो किसी तरह हमारे इतने दिनो के रिश्ते को किसी अंजाम तक पहुचाएगा.....।

पर वो तो बस आगे जंगल की तरफ ही घूरता रहा और जिद पर आकर वो मेरा खूँखार साथी (एक शेर), वो डरावना जानवर...जिसने मुझे इतने दिनो जिन्दा रखा .....मेरी जिन्दगी से हमेशा के लिए गायब हो गया।।


मैं एक बच्चे की तरह रोया था...इसिलिए नही की मुझे अपने बचने की खुशी थी, वो तो थी ही। मैं रो रहा था क्यूँकी रिचर्ड पार्कर (एक शेर) मुझे इतनी बेरुखी से छोड़ गया था ।मेरा दिल टूट गया था।

शायद मेरे अब्बा ठीक ही कहते थे की

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