एक नज़र को देखा , एक नज़र से मिली शाम में है वो मिली, एक सहर भी मिली उसके मिलने से , उल्टा सफर सा हुआ मानो मन्दाकिनी  , एक नहर से मिली ।। सावँली सी है वो , प्यारी मूरत है वो खूबसीरत भी है , खूबसूरत है वो पल ही पल में ही ,वो  नायाब हो गयी पहले बोला नही , अब जरूरत है वो ।।। घुट घुट के जी रहे , घुट घुट के मर रहे प्यार करते है पर ,  कहने से डर रहे सिर्फ उनकी तस्वीर, दिल में है जा बसी हाँ उल्फत के स्वर ,  दिल में है घर रहे ।।।