कुछ खिलौने दिए और मकाँ ले उड़ा

एक एहसाँ के बदले जहां ले उड़ा


सुलाया ना जाने मुझे क्या सुनाकर

और चुपके से फिर आसमाँ ले उड़ा


चंद यादों ने आँखों का रस्ता लिया

चंद सीने से  मेरे धुआँ  ले उड़ा


चलाया भी उसने थकाया भी उसने

मैं प्यासा हुआ वो कुआँ ले उड़ा


हो महफ़ूज़ कहता है तुम अब 'हुसैन'

पर  नींदे  ना जाने कहाँ  ले उड़ा