इन सितारों और सूरज में जो भी ज़िया है

कोई है किसी ने तो ऐसा किया है


सोचो कि एक दिन ये दुनिया ना घूमे

और सूरज समुंदर को उस दिन ना चूमे

क्या हमने कभी ये तसव्वुर किया है


पेड़ों पे फल हैं हवा चल रही है

मुसलसल हमारी उमर ढल रही है

फिर किसने बुढ़ापा जवानी दिया है


हर मौसम अलग और अलग उनकी फ़सलें

हज़ारों मख़लूकें और उनकी कई नस्लें

जुगनू ने किससे चमक फिर लिया है


परिंदों को देखो वो उड़ते हैं कैसे

और बादल बरस कर सिकुड़ते हैं कैसे

ज़मीं ने फिर बारिश का पानी पिया है


गिरगिट का पल में रंग अपना बदलना

यूँ नन्ही सी जाँ का एक कोख में पलना

कोई होता गोरा कोई क्यूँ सियाह है 


कभी रात रौशन कभी चांद आधा

कभी सर्द मौसम कभी धूप ज़्यादा 

फिर किसने ये सब अपने बस में लिया है


कोई है किसी ने तो ऐसा किया है