कोई बेपरवाह, कोई घायल हर अदा पर, कोई मौका ढूंढता, कोई झींकता हर पहल पर, कोई प्यार जताता, कोई इनकार की डगर पर, कोई रिश़्ते बनाता, कोई संकोचों के ढेर पर, कोई दिल जोड़ता, कोई दर्द देने की होड़ पर, कोई दूरियां मिटाता, कोई उलफतों के फेर पर, ना मिलना होता, ना तरंगें बनतीं, ना उलझने होतीं, ना सबब होता, ना अहसास होते, ना कारण बनते, ना भाव जागते, ना उमंगे होतीं, ना हम होते, ना तुम होते, ना शब्दों में सन्नाटा होता, ना सन्नाटों में शब्द।