एक मोड़ पर ठहरा जीवन अपनी राह बदल रहा है.... मैं खुश हूँ एक वक्त के बाद मेरा वक़्त बदल रहा है जाने कहाँ रख कर भूल गयी थी मैं अपने सपने सारे ... आज फिर एक नया सा ख्वाब आँखों में पल रहा है बाँध लिया है खुद को मैंने से एक नए यक़ीन से.... आज़ाद भी हो रही हूँ पुराना पिंजरा पिघल रहा है नयी हैं चुनौतियाँ सामने, चल रही हूँ वज़ूद को लिए.... राहें साथ दे रहीं अब,नये रंग में हर मंज़र ढल रहा है छोड़ दिए पीछे मैंने खौफ़,वहम और गुबार के साए.... काफ़िला दोस्तों का है जो मेरे साथ चल रहा है रंज़ न करना मेरे नए अंदाज़ से अज़ीज़ अक्स मेरे... ज़िन्दगी जीने का अब ज़रा नज़रिया बदल रहा है बड़ा लुत्फ़ आ रहा है जीने में आजकल ..... एक अरसे बाद अब मेरा भी वक़्त बदल रहा है