फ़िर छेड़ें कोई साज़ नया सा
नयी सी धुन आज बनाये कोई....
आवाज़ें नयी शामिल करें आवाज़ों में
बज़्म या महफ़िल नयी सजाएँ कोई....
कुछ नए दोस्त बना ले ज़िन्दगी
तुझे हमदर्द मिल जाये कोई....
या मुड़ देख पुरानी राहों पर
बिछड़ा अज़ीज़ मिल जाए कोई....
तय कर सफर नए जज़्बे से
अनदेखी मंज़िल मिल जाये कोई...
कैद न कर सारी ख्वाहिशों को अपनी
कर ले पूरी ज़रा सी मुमकिन हो कोई....है रवानियत जब तक लहू में
देख, थाम न दे क़दमों को कोई.....
सपने भी सजा नए नवेले तूक्या पता..सच ही हो जाये कोई....


