जी करता है कभी मर कर देखूँ .... कौन उदास होता है मेरे लिए ये छुप कर देखूँ.... आँसुओं का रंग नहीं होता, दुःख के खारे हैं या ख़ुशी के मीठे... सब के आँसू चख कर देखूं जी करता है कभी मर कर देखूं.... सबके चेहरे छू कर देखूँ मुखौटों के पीछे झाँक कर देखूं.... सबकी मन की गहराइयों में डूब कर देखूं.. उल्लास की लहरें हैं या गम की सुनामी एक बार तो मैं उनमे तैर कर देखूं जी करता है कभी मर कर देखूं.... दूर बैठे दोस्तों दुश्मनों से दूर से ही मिल कर देखूं.... शिकवे शिकायतें सब भूल कर देखूं... मेरी खबर का क्या हुआ उन पर असर...... उनके चेहरे को करीब से पढ़ कर देखूं जी करता है कभी मर कर देखूं.... मेरी बातों के शोर से परेशान थे जो उनको अपनी ख़ामोशी सुना कर देखूं उनकी आवाज़ों में अपना ज़िक्र सुन कर देखूं कुछ ही लोग मुझे समझ पाये हैं जो न समझे उन्हें आखिरी सलाम कह कर देखूं जी करता है बस एक बार यूँ ही..... बस यूँ ही मर कर देखूं....