एक अदभुत शब्द.....
अपने आप को पूर्ण किये हुए
अर्थ के अभाव से दूर
अनेकों परिभाषाऐं लिए हुए....!!
ये जड़त्व भी है प्रतिरोध भी
ये बंधित भी है उन्मुक्त भी
ये कभी साहस बने और कभी मजबूरी भी
ये जितना अनचाहा लगे, है उतना ही ज़रूरी भी
ये अभाव ही तो था जिसने आपके कदम बढ़ाये
ये एक प्रभाव भी बना वक़्त ने जब तेवर दिखाये
ये कभी चुभन बना और कभी अगन भी
जब जब जीवन के नए अध्याय आये....
सोचिये सब कुछ अगर पास होता
जीवन कितना नीरस होता
एक शक्ल होती उबाऊ सी
और बस नाम का तमगा होता
कुछ पाने की ललक न होती
बोझिल सा सारा नज़ारा होता
याद करिये कुछ था ....जो नहीं था....
उसी से तो लड़ कर हम रूठ गए थे
नयी चुनैतियों को साथ ले हम बढ़ गए थे
साथ देता रहा सदा एहसास उसका
पहुँच मंज़िल पर क्यों भूल गए
हम एहसान उसका
किसी न किसी शक्ल में शायद कल भी था
और शायद कल भी रहेगा
रिश्ता पुराना है तो साथ ही चलेगा
कभी नज़रिया बदल कर देखना
कुछ कमी का होना जायज़ लगेगा
अपना अभाव आपको प्यारा लगेगा ........!!