
"तो ये तुम्हारी परवरिश की कमी है"
अगर तुम राह चलती हुई लड़की को
इज़्ज़त से नही देखते।
तो ये तुम्हारी परवरिश की कमी है।
अगर उस में बस एक सहमा हुआ बलि का जानवर ही नज़र आता है।
तो ये तुम्हारी परवरिश की कमी है।
अगर तुम सिर्फ उसके कपड़ों को उसके स्कर्ट को उसके बिना दुपट्टे सीने को देखते हो।
तो ये तुम्हारी परवरिश की कमी है।
तुम्हारे संस्कार ने तुमको क्या सिखाया है?
जिसको तुमने अपनी तहज़ीब बनाया है
तुम्हारी घर की औरत को कोई और इस तरह देखे।
तो मरने मारने पे क्यों तैयार हो जाते।
तब क्यों तुम्हे तुम्हारे संस्कार याद आ जाते।
क्यों के तुमने सीखा ही नही औरत को इज़्ज़त देना।
क्यों के ये तुम्हारी परवरिश की कमी है।
क्यों ज़िन्दगी देने वाले पेड़ को खुद काट देते हो?
अगर बेटी है पेट में तो अजन्मी मार देते हो।
अरे! सुन लो बे
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