बेवजह की ख्वाहिशों को कुर्बान किया जाता है
अपनी जिंदगी को बस यूँ ही आसान किया जाता है
शायद खता है ,बचपन के लम्हो को फिर जीना
मजा ये है,यूँ ही दिल को फिर नादान किया जाता है
किसी महफ़िल में गर्मजोशी से मिलो दुश्मन से
इस तरह दुनिया को भी कभी हैरान किया जाता है
गर किसी वक़्त पे हारा हुआ अपना ख्याल लगे
उठ कर फिर हौसलें को आसमान किया जाता है
मंज़िल पाने के लिए फ़क़त खुद में यकीन जरूरी है
इसी यकीन से ही सफर आसान किया जाता है
हर एक मसले पे फ़िज़ूल शोर शराबा कैसा
गुमनाम होकर भी कुछ काम किया जाता है ।
जरूरी ये तो नही दिल हरदम तेरा ख्याल बुने
फ़क़त इस दिल को भी तो आराम दिया जाता है।
#शैलेष त्रिपाठी


