मानवता के डगर पे's image
Poetry1 min read

मानवता के डगर पे

Shivraj AnandShivraj Anand October 24, 2022
Share0 Bookmarks 46602 Reads0 Likes
प्यारे  तुम मुझे भी अपना लो ।
गुमराह हूं  कोई राह बता दो।
युं ना छोडो एकाकी अभिमन्यु सा रण पे।
मुझे भी साथले चलो मानवताकी डगर पे।।
वहां बडे सतवादी है।
सत्य -अहिंसाकेपुजारी हैं।।
वे रावण के  अत्याचार को  मिटा देते हैं।
हो गर हाहाकार तो सिमटा देते है।।
इस पथ मे कोई जंजीर नही
                   जो बांधकर जकड सके।
पथ मे कोई विध्न नही
                      जो रोककर अ क ड सके।।
है ऐ मानवता

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts