राम लला अयोध्या पधारे,

गूँजे नगरी में भक्तों के जयकारे।

गाथा एक नायक की,

जो संघर्ष भरी है।

मानव अवतार में जो लीला करी है।

बिना किसी प्रश्न के स्वीकारा था वनवास,

ले आज्ञा पिता की छोङ चले सब राजकाज।

संघर्षमय जीवन की प्रेरणा हो आप,

सर्वश्रेष्ठ पुत्र की मिसाल हो आप।

स्वयं कष्ट सहकर मानवता को दिया संदेश,

विजय निश्चय ही होगी,

यदि मन में बुराई का वर्जित है प्रवेश।