इस भाग दौङ की जिंदगी में ,
ठहराव सिर्फ अभी आया है।
जब पहली बार खुद को,
प्रकृति की गोद में पाया है।
नई कोपलों को पल्लवित होते देखा,
गिलहरियों को उछलते कूदते देखा।
चिरैया का चहचहाना,
किट पकङ बच्चों को खिलाना।
अदृश्य कोयल की सिर्फ कूक सुने,
तिनका-तिनका एकत्र कर,
बया अनोखा नीङ बुने।
सर्वत्र पर्यावरण का सौन्दर्य समाया है,
यह आनन्द इस ठहराव में ही मिल पाया है।
टिटहरी की क्षेत्र रक्षार्थ सजगता,
गिरगिट की रंग बदलने में सहजता।
सोन चिड़िया का संयुक्त होकर गाना,
बादल देख मयुर का फैलाकर पंख मुस्काना।
मानो साक्षात स्वर्ग उतर आया है,
यह आनन्द इस ठहराव में ही मिल पाया है।


