ठहर जा ऐ मुसाफिर .........


    दुनिया की इस जंग में यू चलना तू रुक जा ऐ मुसाफिर वक्त हैं तू झुक जा ऐ मुसाफिर, जिन्दगी बडी है तू सम्भल जा ऐ मुसाफिर थाम अपने कदमो को घर में ,कर सरकार की बातो को तू अमिल ,इस जंग में रूक जा ऐ मुसाफिर बात कर लोगों से ,तू दुनिया में झुक जा ऐ मुसाफिर, जिन्दगी बहुत बड़ी है, तू ठहर जा ऐ मुसाफिर, कर ले वो हर काम जो तुने सोचा था भिड़ मे आज तनहाई है मौहोल में अब तो समझ जा ऐ मुसाफिर छोड़ दे ये भिडो में जा ना कुछ पल घरो मे ठहर जा ऐ मुसाफिर ,जरूरी है तभी तो किया होगा ना सब कुछ ,ना जंग रही हैं देशो की ना भिड़ रही है लोगों की अब तो सुधर जा ना मुसाफिर ,मान ले कुछ इस मुह बोली सरकार की भी सुधर जा ऐ मुसाफिर, इस जंग में सम्भल जा ऐ मुसाफिर, 

कुदरत भी दे रही हैं धोखा अभी तो कुछ तो समझ जा ऐ मुसाफिर कहर बड़ा भारी है दुनिया पर तभी तो दिया ना साथ उन मंदिरो ने भी साथ, अरे पागल अब तो सुधर जा ऐ मुसाफिर शौक ना रख कर खुमने का थोड़ा बहक जा ऐ मुसाफिर छोड़ दे ये पेसो का रोना छोड़ दें ये धर्म कर्म का ताना बाना, बस तू रुक जा ऐ मुसाफिर,, खा कर खाना परिवार के साथ कुछ पल बेढ जा ना ऐ मुसाफिर, करने वालो को करने दो काम उनका, पर तू भी तो अपना काम कर जा ना ऐ मुसाफिर सम्भल जा ना ऐ मुसाफिर, सरकार, कानून भी दे रही हैं समर्थन अब तो तू रूक जा ऐ मुसाफिर कहर कुछ दिनों का है यारा बस तू घर ही रह जा ना मुसाफिर सोशल डिस्टंसी (social distance) का तू रखना ध्यान जरा, खुद के लिए नहीं तो अपनो के लिए ही सही मगर कुछ ना कर बस ठहर जा ऐ मुसाफिर, ठहर जा ऐ मुसाफिर.।.......... 

   


             साक्षी यादव ..