आज फिर क़ैद में हैं सब जुगनूरात फिर रौशनी पे भारी हैंफिर भी उम्मीद टिमटिमाती हैंहमसे सुबह की वफादारी हैं
आज फिर क़ैद में हैं सब जुगनूरात फिर रौशनी पे भारी हैं
फिर भी उम्मीद टिमटिमाती हैंहमसे सुबह की वफादारी हैं