ख़ुद पे इतने उधार हो आये,
ख़ुद के ही ख़रीदार हो आये
वो समंदर थे, ख़ुद ही में डूबे,
हम थे तिनका सो पार हो आये
जिन्हें दिल के क़रीब रखते थे,
वो दिल के आर-पार हो आये
अपनी परछाइयों से डरते हैं,
कब हमीं पे सवार हो आये
-साहिल


ख़ुद पे इतने उधार हो आये,
ख़ुद के ही ख़रीदार हो आये
वो समंदर थे, ख़ुद ही में डूबे,
हम थे तिनका सो पार हो आये
जिन्हें दिल के क़रीब रखते थे,
वो दिल के आर-पार हो आये
अपनी परछाइयों से डरते हैं,
कब हमीं पे सवार हो आये
-साहिल