चलो अखबार जलाएं,
तिमिर घनेरा है l
कोई उत्सव ही मनाएं
तिमिर घनेरा है ll
झूठ ही कहने के,
सुनने के, सभी आदी हैं l
चिताएं सच की जलाएं,
तिमिर घनेरा है ll
दिल हो पत्थर की डली,
रीढ़ हो मुलायम सी l
वो भी इन्सां गिने जायें,
तिमिर घनेरा है ll
जहाँ महल ही ना हों,
सब छतें बराबर हों l
शहर एक ऐसा बसाएं,
तिमिर घनेरा है ll
-साहिल


