सुनो कोकिला, उड़ जाओ तुम

विदा गीत ना गा पायेंगे


रुंधे हुए हैं गले सुरों के,

शहनाई से आँसू टपके,

साँस ताल की उखड़ी-उखड़ी,

बोल आँख से बह जायेंगे, 

विदा गीत ना गा पायेंगे


ज़हर बुझे युग की तुम अमृत,

बुझे दीये कर देती जीवित,

अमृत भरे कलश सब फूटे, 

दीप तिमिर में खो जायेंगे,

विदा गीत ना गा पायेंगे

-साहिल

Twitter: @Saahil_77 


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