बड़ी मुद्दत हुई मुझको
मेरा दिल कुछ मिला ऐसे
दीवाली की सफ़ाई में
पुरानी डायरी जैसे
हर इक सफ़्हे पे कुछ सपने
जो पेंसिल से तराशे थे
कहीं देखे नहीं कोई
रबर घिस के मिटाते थे
उधेड़ा था जिन्हें ज़्यादा
वही ज़्यादा नुमाया हैं
वो पन्ने गल गए लेकिन
अभी तक ख़्वाब ताज़ा हैं
- साहिल
@Saahil_77
