फिर से आ कर छड़ी घुमा, ओ जादूगर
इंद्रधनुष फिर वही बना, ओ जादूगर
पिछले रंग चटक थे, लेकिन कच्चे थे
उड़े, ज़रा सी चली हवा, ओ जादूगर
झाँक रही है कालिख रंगो के पीछे
एक परत तो और चढ़ा, ओ जादूगर
अबकी सोने-चांदी से भी मढ़ देना
आँखें सबकी दे चुँधिया, ओ जादूगर
- साहिल
Twitter: @Saahil_77


