साँस चलती तो है जीने का हुनर याद नहीं
पाँव चलते तो हैं मंज़िल की डगर याद नहीं
याद से, दिल से, निगाहों से निकाला हम को
अब कहाँ जाएं कोई और तो घर याद नहीं
हम नहीं वो जो हर एक ज़ुल्म पे रोया करते
ज़ख्म सब भूल गए, चाक जिगर याद नहीं
रात ही रात, मुसलसल है अंधेरा यारों
हाल फिलहाल में देखी हो सहर, याद नहीं
- साहिल
Twitter: @Saahil_77
