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गुफ़्तगू - Part 1


कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है.कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते- इरतिज़ा निशात

कुर्सी या जनाज़ा हो, कोई फ़र्क़ नहीं हैजो इन पे चढ़े, खुद से वो उतर नहीं पाते

— साहिल
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