कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है.कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते- इरतिज़ा निशातकुर्सी या जनाज़ा हो, कोई फ़र्क़ नहीं हैजो इन पे चढ़े, खुद से वो उतर नहीं पाते
कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है.कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते- इरतिज़ा निशात
कुर्सी या जनाज़ा हो, कोई फ़र्क़ नहीं हैजो इन पे चढ़े, खुद से वो उतर नहीं पाते